एक बोतल पानी और साढ़े सात घंटे का इंतजार
CUET परीक्षा में अव्यवस्था से टूटा विद्यार्थियों का मनोबल
रायपुर 31 मई 2026//“मैंने सोचा था कि यह परीक्षा मेरे सपनों की शुरुआत होगी, लेकिन उस दिन ऐसा लगा जैसे हमारे भविष्य के साथ कोई प्रयोग किया जा रहा हो…”
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| परीक्षा केंद्र में परीक्षार्थियों और पालकों की भीड़ |
यह कहना है 12वीं पास एक ऐसे छात्र का, जो शनिवार को रायपुर के ION डिजिटल ज़ोन सरोना में आयोजित CUET प्रवेश परीक्षा देने पहुंचा था।
सुबह 7 बजे रिपोर्टिंग टाइम था। कई विद्यार्थी तो 6 बजे ही घर से निकलकर परीक्षा केंद्र पहुंच गए थे। जल्दीबाजी में किसी ने ठीक से नाश्ता नहीं किया, तो कोई सिर्फ एक बोतल पानी लेकर अंदर गया। उन्हें क्या पता था कि अगले साढ़े सात घंटे उनकी सहनशक्ति और धैर्य की परीक्षा लेने वाले हैं।
पहली पाली की परीक्षा सुबह 9 बजे शुरू होनी थी, लेकिन सर्वर डाउन,तकनीकी और प्रबंधन संबंधी अव्यवस्था के कारण पेपर करीब 11:30 बजे शुरू हुआ। हजारों छात्र भीषण 45 डिग्री गर्मी में घंटों कमरे में बैठे रहे। कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। कुछ छात्र परीक्षा बीच में छोड़कर बाहर निकल आए। कई परीक्षार्थियों की ट्रेन और बसें छूट गईं।
सबसे दर्दनाक बात यह रही कि अंदर मौजूद बच्चों के पास सिर्फ एक पानी की बोतल थी। न भोजन की व्यवस्था, न समय पर सूचना, न मानसिक तनाव कम करने का कोई प्रयास। परीक्षा केंद्र में बैठे छात्र सिर्फ घड़ी देखते रहे और मन ही मन यह सोचते रहे कि क्या यही देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी की तैयारी है?
दूसरी पाली की परीक्षा भी दोपहर 3 से 6 बजे तक निर्धारित थी, लेकिन वह भी देरी से शुरू हुई। इससे पालकों में भारी नाराजगी देखी गई। केंद्र के बाहर अभिभावक घंटों परेशान खड़े रहे। किसी को अपने बच्चे की चिंता थी, तो कोई प्रशासनिक अव्यवस्था पर गुस्सा जाहिर कर रहा था।
एक छात्र ने भावुक होकर कहा,
“हम महीनों मेहनत करते हैं, रात-रात भर पढ़ाई करते हैं, ताकि अच्छे कॉलेज में प्रवेश मिल सके। लेकिन परीक्षा के दिन ऐसा व्यवहार होता है कि आत्मविश्वास ही टूट जाता है। लगता है कि हमारी मेहनत और समय की कोई कीमत नहीं है।”
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) पहले भी कई बार सवालों के घेरे में रही है। NEET और CBSE की परीक्षाओं को लेकर विवादों के बाद अब CUET में हुई यह भारी अव्यवस्था छात्रों और अभिभावकों के भरोसे को लगातार कमजोर कर रही है। इससे पहले 28 मई को बकरीद के दिन परीक्षा तय किया गया था, जिसे बाद में तारीख बदली गई थी।
सवाल यह है कि करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़ी परीक्षाओं में आखिर इतनी लापरवाही क्यों?
क्या विद्यार्थियों का मानसिक तनाव, उनका समय और उनका भविष्य अब केवल “तकनीकी समस्या” बनकर रह गया है?
देश के युवा सपने लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचते हैं। वे सफलता चाहते हैं, अवसर चाहते हैं। लेकिन जब प्रवेश परीक्षा ही अव्यवस्था, इंतजार और असंवेदनशीलता का प्रतीक बन जाए, तब सबसे ज्यादा चोट उनके मनोबल पर पड़ती है।
CUET परीक्षा का यह दिन सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के धैर्य, विश्वास और उम्मीदों की कठिन परीक्षा बन गया।

