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महासमुंद में नेशनल लोक अदालत का बड़ा असर: 68,586 प्रकरणों का निराकरण, 8.37 करोड़ रुपये के अवार्ड पारित

28 खंडपीठों में आपसी सुलह-समझौते से मामलों का निराकरण, MACT के 9 मामलों में 1.03 करोड़ रुपये का अवार्ड

महासमुंद, 12 सितंबर 2026। न्यायालयों में लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण और पक्षकारों को आपसी सुलह एवं समझौते के माध्यम से विवादों का समाधान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शनिवार को महासमुंद जिले में वर्ष 2026 की तृतीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। जिला न्यायालय महासमुंद, कुटुम्ब न्यायालय तथा पिथौरा, सरायपाली, बसना और बागबाहरा स्थित न्यायालयों सहित विभिन्न सिविल, श्रम एवं राजस्व न्यायालयों में कुल 28 खंडपीठों का गठन किया गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण महासमुंद की सचिव श्रीमती आफरीन बानो ने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती अनिता डहरिया के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में आयोजित लोक अदालत में विभिन्न प्रकृति के मामलों का निराकरण किया गया। जिला न्यायालय के सभाकक्ष में दीप प्रज्ज्वलित कर लोक अदालत का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस दौरान न्यायाधीशगण, अधिवक्तागण, पक्षकार, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी तथा वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती अनिता डहरिया, कुटुम्ब न्यायालय के न्यायाधीश श्री प्रफुल्ल कुमार सोनवानी, प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश सुश्री संघपुष्पा भतपहरी सहित अन्य पीठासीन अधिकारी उपस्थित रहे।

बैंक, बिजली और MACT सहित विभिन्न मामलों का निराकरण

नेशनल लोक अदालत में श्रमिक विवाद, बैंक रिकवरी, विद्युत एवं देयकों के बकाया की वसूली, राजीनामा योग्य दांडिक प्रकरण, परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के मामले, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), विद्युत अधिनियम के तहत प्रकरण तथा सिविल मामलों की सुनवाई की गई।

प्री-लिटिगेशन मामलों में बैंक रिकवरी के 5,337 प्रकरणों में 19 लाख 89 हजार 261 रुपये, विद्युत के 11,072 प्रकरणों में 59 लाख 94 हजार 810 रुपये, श्रम संबंधी 9 प्रकरणों में 3 लाख 19 हजार 700 रुपये, MACT के 46 प्रकरणों में 5 करोड़ 15 लाख 36 हजार रुपये तथा एनआई एक्ट-138 के 21 प्रकरणों में 46 लाख 59 हजार 747 रुपये के अवार्ड पारित किए गए।

वहीं जिले के विभिन्न तहसील एवं अनुभाग क्षेत्रों के राजस्व न्यायालयों के माध्यम से 47,531 प्रकरणों का निराकरण किया गया।

इस प्रकार नेशनल लोक अदालत में विभिन्न खंडपीठों के माध्यम से कुल 68,586 प्रकरणों का निराकरण किया गया तथा 8 करोड़ 37 लाख 76 हजार 690 रुपये की राशि के अवार्ड पारित किए गए।

कबाड़ से जुगाड़ की प्रदर्शनी ने खींचा ध्यान

नेशनल लोक अदालत के दौरान जिला न्यायालय परिसर में शासकीय बाल संप्रेक्षण गृह बरोण्डा बाजार में रह रहे विधि से संघर्षरत बालकों द्वारा पुरानी एवं अनुपयोगी सामग्री से तैयार की गई वस्तुओं की प्रदर्शनी भी लगाई गई।

स्टॉल में चित्रकला, क्राफ्ट एवं हस्तशिल्प की विभिन्न सामग्रियां प्रदर्शित की गईं। संस्था के कला एवं क्राफ्ट शिक्षक केदार धीवर एवं उनके सहयोगियों द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई। न्यायाधीशों, अधिवक्ताओं, पक्षकारों एवं न्यायालयीन कर्मचारियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा की सराहना की।
इसके अलावा वन विभाग द्वारा वनोषधि सामग्री, श्रम विभाग द्वारा श्रम पंजीयन तथा स्वास्थ्य एवं आयुष विभाग द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य जांच एवं दवाइयों का वितरण किया गया। शिक्षा विभाग की ओर से शासकीय बृजराज शाला महासमुंद के विद्यार्थियों को पुस्तकें भी वितरित की गईं।

पक्षकारों को पौधे भेंट कर दिया हरियाली का संदेश

नेशनल लोक अदालत में न्यायिक कार्यवाही के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती अनिता डहरिया के मार्गदर्शन में विभिन्न खंडपीठों के पीठासीन अधिकारियों ने न्यायालय पहुंचे पक्षकारों को फलदार एवं छायादार पौधे भेंट किए।
पक्षकारों को पौधों की देखभाल और वृक्षारोपण के लिए प्रेरित किया गया। वन विभाग द्वारा भी न्यायालय परिसर में आम नागरिकों एवं पक्षकारों को पौधे वितरित किए गए।


MACT के 9 मामलों में 1.03 करोड़ रुपये के अवार्ड

नेशनल लोक अदालत में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण से संबंधित मामलों में भी महत्वपूर्ण निराकरण हुआ। खंडपीठ क्रमांक-1 की पीठासीन अधिकारी एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती अनिता डहरिया के समक्ष लंबित MACT के 9 प्रकरणों का निराकरण किया गया।
इनमें 5 प्रकरण मृतकों के वारिसों से संबंधित तथा 4 प्रकरण आहत पक्षकारों से संबंधित थे। इन मामलों में कुल 1 करोड़ 3 लाख 70 हजार रुपये के अवार्ड पारित किए गए। पीठासीन अधिकारी द्वारा पक्षकारों को समझाइश दिए जाने के बाद आपसी सुलह एवं समझौते के आधार पर मामलों का निराकरण किया गया। इस अवसर पर मृतकों के परिजनों, वारिसों एवं आहत पक्षकारों को पौधे भेंट कर वृक्षारोपण का संदेश दिया गया।

समझाइश से टूटा विवाद, फिर साथ रहने को तैयार हुए दंपती

नेशनल लोक अदालत में पारिवारिक विवादों के समाधान की मानवीय तस्वीर भी सामने आई। कुटुम्ब न्यायालय की खंडपीठ क्रमांक-2 के समक्ष हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13(1)(क) के तहत विवाह विच्छेद से संबंधित प्रकरण लंबित था। प्रकरण में दोनों पक्ष वर्ष 2021 से अलग रह रहे थे। लोक अदालत में मामले को राजीनामा के लिए रखा गया। कुटुम्ब न्यायालय के पीठासीन अधिकारी श्री प्रफुल्ल कुमार सोनवानी द्वारा दोनों पक्षों को समझाइश एवं आपसी संवाद के माध्यम से विवाद समाप्त करने का प्रयास किया गया। समझाइश से प्रभावित होकर दोनों पक्ष एक साथ रहकर दाम्पत्य जीवन निर्वाह करने के लिए सहमत हो गए। आपसी राजीनामा होने पर प्रकरण की कार्यवाही समझौते के आधार पर समाप्त कर दी गई। इसी तरह एक अन्य दाम्पत्य विवाद में भी पीठासीन अधिकारी के समझाइश एवं सुलह प्रयास के बाद दोनों पक्ष साथ रहने और दाम्पत्य जीवन आगे बढ़ाने के लिए सहमत हुए। दोनों मामलों में पक्षकारों को पौधे भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

व्हीलचेयर पाकर रागिनी के चेहरे पर आई मुस्कान

नेशनल लोक अदालत में एक अन्य मानवीय पहल के तहत दिव्यांग बालिका रागिनी धृतलहरे को व्हीलचेयर प्रदान की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव को ग्राम धनसुली निवासी सीताराम धृतलहरे द्वारा अपनी 20 वर्षीय पुत्री के लिए व्हीलचेयर उपलब्ध कराने के संबंध में आवेदन दिया गया था। रागिनी जन्म से ही दोनों पैरों से चलने में असमर्थ है। वह घर से बाहर निकलकर गांव की गलियों और चौक-चौराहों पर जाना चाहती थी, लेकिन चलने में असमर्थता के कारण उसे परेशानी होती थी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की प्रभारी सचिव एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुश्री चेतना ठाकुर ने मामले को संवेदनशीलता से लेते हुए समाज कल्याण विभाग को शासन की योजनाओं के तहत आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। इसके बाद समाज कल्याण विभाग महासमुंद द्वारा नेशनल लोक अदालत के अवसर पर रागिनी को व्हीलचेयर प्रदान की गई। व्हीलचेयर मिलने के बाद रागिनी के चेहरे पर खुशी नजर आई। अब वह अपने घर से बाहर निकलकर गांव की गलियों और चौक-चौराहों तक आसानी से आ-जा सकेगी।

हाईब्रिड नेशनल लोक अदालत का सफल आयोजन

देशभर में 12 सितंबर 2026 को उच्चतम न्यायालय से लेकर तहसील स्तर तक एक साथ हाईब्रिड नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। महासमुंद जिले में भी इसके सफल आयोजन के लिए विगत कई माह से तैयारी की जा रही थी। पक्षकारों को पूर्व में नोटिस जारी कर प्री-सीटिंग के माध्यम से आपसी सहमति एवं राजीनामा के लिए प्रोत्साहित किया गया। लोक अदालत की सफलता में महासमुंद के अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों, न्यायालयीन कर्मचारियों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

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