विधायक के आदर्श ग्राम में नियमों की उड़ रही धज्जियां, धधक रहे अवैध ईंट भट्ठे
धमतरी/कुरूद। सरकार जहां एक ओर स्वच्छ पर्यावरण और स्वस्थ जीवन का संदेश दे रही है, वहीं धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड अंतर्गत विधायक अजय चंद्राकर के गोद लिए आदर्श ग्राम परखंदा में संचालित कथित अवैध ईंट भट्ठों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि रिहायशी क्षेत्रों तथा नदी तटीय इलाकों के समीप सार्वजनिक भूमि पर नियमों को दरकिनार कर ईंट भट्ठों का संचालन किया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार कुछ ठेकेदारों द्वारा परंपरागत कुम्हार समुदाय के नाम पर बड़े पैमाने पर लाल ईंटों का निर्माण कर व्यावसायिक लाभ अर्जित किया जा रहा है। आरोप है कि इन भट्ठों में प्रतिवर्ष लाखों रुपये के ईंटों का उत्पादन किया जाता है, जबकि आवश्यक शासकीय अनुमतियों और पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है।
सरपंच प्रतिनिधि मोहित साहू ने बताया कि कई भट्ठे सार्वजनिक जमीन पर संचालित हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन इकाइयों के पास न तो खनिज विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) है और न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्वीकृति। इसके बावजूद भट्ठों का संचालन लगातार जारी है, जिससे निकलने वाला धुआं और राख आसपास के घरों तक पहुंच रही है। इससे ग्रामीणों को आंखों में जलन, सांस संबंधी समस्याओं और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि कुछ प्रभावशाली लोग अपने रसूख का उपयोग कर सरकारी भूमि पर कब्जा कर अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क तक नहीं हो पाता।
ग्राम सचिव लुकेश साहू ने बताया कि पंचायत द्वारा संबंधित लोगों को कई बार समझाइश दी गई है और नोटिस भी जारी किए गए हैं, लेकिन निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नियमों की अनदेखी से गांव का पर्यावरण प्रभावित हो रहा है और ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
इस संबंध में कुरूद एसडीएम नभ सिंह कोसले ने कहा कि मामले की जानकारी मिलने पर खनिज विभाग को जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो पर्यावरणीय क्षति और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि शिकायतों की जांच कर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

