करेली बड़ी में सत्ता संग्राम: नगर पंचायत गठन के बाद सरपंच-पंचों का बगावती तेवर, चक्का जाम की चेतावनी
धमतरी। मगरलोड विकासखंड के करेली बड़ी में ग्राम पंचायत के नगर पंचायत में विलोपन के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। ग्राम पंचायत के निर्वाचित सरपंच, उपसरपंच एवं पंचों ने आरोप लगाया है कि नगर पंचायत गठन के बाद उन्हें उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
सरपंच खेमलता साहू एवं पंचों का कहना है कि वे जनमत से चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं और नगर पंचायत गठन संबंधी मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में अंतिम निर्णय आने से पहले उनके अधिकारों को समाप्त करने अथवा उन्हें पद से बेदखल करने का प्रयास अनुचित है।
प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पंचायत भवन में सरपंच एवं पंचों के कक्षों पर ताला लगाया गया है तथा नगर पंचायत के लिए चयनित समिति के सदस्य पंचायत व्यवस्था का संचालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका सीमित हो गई है और प्रशासनिक कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप बढ़ा है।
सरपंच एवं पंचों का यह भी आरोप है कि पंचायत सचिव द्वारा शासन से प्राप्त 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग और निकासी में सहयोग नहीं किया जा रहा है, जिससे विकास कार्य ठप पड़ने की स्थिति निर्मित हो रही है। उनका कहना है कि सचिव का प्रभार भी दबावपूर्वक और बिना पर्याप्त जानकारी के हस्तांतरित किया गया, जिसका विरोध सरपंच, उपसरपंच, लगभग 20 पंचों तथा ग्रामीणों द्वारा किया जा रहा है।
ग्रामीण प्रतिनिधियों के अनुसार इस संबंध में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), कलेक्टर तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार आवेदन देकर शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक संतोषजनक समाधान नहीं निकल पाया है।
पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्तमान विवाद का सीधा असर करेली बड़ी के विकास कार्यों पर पड़ रहा है। पेयजल, स्वच्छता, निर्माण कार्य और अन्य जनहित योजनाएं प्रभावित हो रही हैं, जिसका नुकसान आम ग्रामीणों को उठाना पड़ रहा है।
सरपंच खेमलता साहू एवं पंचों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया और न्यायोचित समाधान नहीं निकला, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने आवश्यकता पड़ने पर चक्का जाम जैसे जनआंदोलन की भी चेतावनी दी है।
ग्रामीणों की मांग है कि न्यायालय के अंतिम निर्णय तक निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों और पंचायत व्यवस्था को लेकर स्पष्ट प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि क्षेत्र के विकास कार्य बाधित न हों और विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकल सके।
