₹6.94 करोड़ की सड़क दो साल में दरकी: पहली ही बारिश में खुली निर्माण की पोल, पीडब्ल्यूडी और ठेकेदार पर उठे गंभीर सवाल
5 वर्ष की परफॉर्मेंस अवधि के बावजूद सड़क में लंबी दरारें, गुणवत्ता जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग तेज
कुरूद,धमतरी, 05 जुलाई 2026। शासन की करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सड़कों को लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित बनाने का दावा किया जाता है, लेकिन धमतरी जिले के कुरूद क्षेत्र में बना एक सड़क मार्ग इन दावों की हकीकत बयां कर रहा है। लगभग 6 करोड़ 94 लाख 74 हजार रुपये की लागत से निर्मित सड़क निर्माण कार्य पूरा हुए अभी दो वर्ष भी पूरे नहीं हुए हैं कि सड़क कई स्थानों पर दरकने लगी है। पहली ही बारिश में सड़क के किनारे आई लंबी-लंबी दरारों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुरूद-चर्रा से बोरझरा-संबलपुर मार्ग चौड़ीकरणस्थल से प्राप्त तस्वीरों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि सड़क के किनारे बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं। यदि समय रहते इनका सुधार नहीं कराया गया तो यह दरारें और चौड़ी होकर सड़क को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर सकती हैं। इससे किसी भी समय बड़ा सड़क हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सूचना पट्ट के अनुसार यह सड़क निर्माण कार्य छत्तीसगढ़ रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (लोक निर्माण विभाग) के माध्यम से कराया गया है। बोर्ड में अंकित जानकारी के अनुसार कार्य का नाम कुरूद–चर्रा–छाती–उड़ेना–झिरिया–कण्डेल–भोथली–बोरझरा–संबलपुर मार्ग का चौड़ीकरण एवं उन्नयन (पुल-पुलिया सहित) है। सड़क की कुल लंबाई 5 किलोमीटर है तथा निर्माण कार्य का अनुबंध लगभग 694.74 लाख रुपये का है। कार्य प्रारंभ की तिथि 22 जनवरी 2022 तथा पूर्ण करने की संभावित तिथि 22 दिसंबर 2023 अंकित है। इसके साथ ही निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद 5 वर्ष की परफॉर्मेंस अवधि भी निर्धारित की गई है।
इसके बावजूद सड़क का इतनी कम अवधि में क्षतिग्रस्त होना कई सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया गया तथा सामग्री और तकनीकी मानकों में लापरवाही बरती गई। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ किया गया होता तो सड़क पहली ही बारिश में इस तरह नहीं टूटती।
ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों का कहना है कि सड़क के किनारे पड़ चुकी दरारें लगातार बढ़ रही हैं। यदि तत्काल मरम्मत और तकनीकी परीक्षण नहीं कराया गया तो पूरी सड़क प्रभावित हो सकती है, जिससे आवागमन बाधित होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाएगा। विशेषकर बरसात के मौसम में दोपहिया वाहन चालकों और साइकिल सवारों के लिए यह सड़क जानलेवा साबित हो सकती है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन एवं लोक निर्माण विभाग से मांग की है कि सड़क निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी एवं गुणवत्ता जांच कराई जाए। यदि जांच में निर्माण में लापरवाही या वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही सड़क की तत्काल मरम्मत कराकर आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
यह मामला केवल एक सड़क के क्षतिग्रस्त होने का नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के सार्वजनिक धन के उपयोग और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से जुड़ा है। अब यह देखना होगा कि लोक निर्माण विभाग इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है और जनता के सवालों का जवाब किस प्रकार देता है।

