धमतरी के जंगल में वन्यजीवों का शिकार, एंटी-पोचिंग टीम के शिकंजे में पांच आरोपी
धमतरी, 09 जुलाई 2026। धमतरी वनमंडल के बिरगुड़ी परिक्षेत्र अंतर्गत खैरभरी बीट के आरक्षित वन में वन्यजीवों के अवैध शिकार के मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद माननीय न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, नगरी ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 4 जुलाई 2026 को जिला कांकेर की तहसील नरहरपुर के ग्राम भनसुली निवासी विनोद कुमार टेकाम, घसिया, प्रदीप नेताम, शैलेन्द्र कुमार यादव एवं शिवानंद मरकाम ने धमतरी वनमंडल के बिरगुड़ी परिक्षेत्र स्थित खैरभरी बीट के आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 433 में तीन धामन (असोड़िया) सांप एवं एक गोह का शिकार किया। आरोप है कि शिकार किए गए वन्यजीवों को आरोपी विनोद टेकाम के घर ले गए, जहां उनके छोटे-छोटे टुकड़े कर सब्जी बनाई गई और सभी आरोपियों ने उसका सेवन किया।
मामले की सूचना मिलते ही वनमंडलाधिकारी श्री जाधव श्रीकृष्ण के निर्देश पर धमतरी वनमंडल, कांकेर वनमंडल, उड़नदस्ता दल तथा एंटी-पोचिंग टीम ने संयुक्त अभियान चलाया। टीम ने ग्राम भनसुली पहुंचकर संदिग्धों से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद वन विभाग ने उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर लिया।
वन विभाग ने आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 2(20), 9, 39, 50, 51 एवं 52 के तहत वन अपराध प्रकरण क्रमांक 16920/01, दिनांक 07 जुलाई 2026 दर्ज किया। इसके पश्चात सभी आरोपियों को माननीय न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, नगरी के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए गए।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है तथा यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों का किसी संगठित शिकार गिरोह से संबंध तो नहीं है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
वन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वन्यजीवों के शिकार, तस्करी अथवा अवैध गतिविधियों की जानकारी तत्काल विभाग को दें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत अनुसूचीबद्ध वन्यजीवों के शिकार पर तीन से सात वर्ष तक के कठोर कारावास तथा आर्थिक दंड का प्रावधान है। वन्यजीवों का संरक्षण जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है, इसलिए ऐसे अपराधों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
