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“नियमानुसार जो बेहतर होगा, जरूर करेंगे…” सीतानदी-उदंती के ग्रामीणों की समस्याओं पर वन मंत्री केदार कश्यप का बड़ा आश्वासन

जंगल-जमीन संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने सड़क, पुल-पुलिया, बिजली, वनाधिकार और विस्थापन से जुड़े मुद्दे उठाए; मंत्री ने नगरी-सिहावा पहुंचकर जमीनी स्थिति देखने की कही बात

नगरी/धमतरी 02 सितम्बर 2026। सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व क्षेत्र के गांवों में मूलभूत सुविधाओं की कमी, वनाधिकार से जुड़े मामलों और विस्थापन संबंधी चिंताओं को लेकर जंगल-जमीन संघर्ष समिति सीतानदी-उदंती के प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप से मुलाकात की। स्थानीय आदिवासी स्वास्थ्य परम्परा एवं पादप औषधीय बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम एवं जिला पंचायत धमतरी के अध्यक्ष अरुण सार्वा के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं से मंत्री को अवगत कराते हुए मांगों से संबंधित विस्तृत आवेदन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री के समक्ष बताया कि सीतानदी-उदंती क्षेत्र में निवासरत ग्रामीण लंबे समय से सड़क, पुल-पुलिया, बिजली सहित कई बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। दुर्गम वन क्षेत्र होने के कारण आवागमन और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच में ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही वनाधिकार से जुड़े विभिन्न मामलों तथा विस्थापन को लेकर ग्रामीणों में बनी चिंताओं को भी प्रमुखता से रखा गया।

“नियमानुसार जो भी बेहतर होगा, उन कार्यों को अवश्य करेंगे”

वन मंत्री केदार कश्यप ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और ग्रामीणों की समस्याओं पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि “नियमानुसार जो भी बेहतर होगा, उन कार्यों को अवश्य करेंगे।” मंत्री ने यह भी कहा कि वे शीघ्र ही नगरी-सिहावा क्षेत्र में स्वयं पहुंचकर ग्रामीणों और क्षेत्र की समस्याओं से रूबरू होंगे तथा उनके निराकरण की दिशा में उचित पहल करेंगे। मंत्री के इस आश्वासन के बाद जंगल-जमीन संघर्ष समिति और क्षेत्र के ग्रामीणों में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान को लेकर उम्मीद जगी है।

समस्याओं के निराकरण के लिए ठोस पहल की उम्मीद : विकास मरकाम

मुलाकात के बाद विकास मरकाम ने कहा कि सीतानदी-उदंती क्षेत्र के ग्रामीणों की समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। इन समस्याओं को गंभीरता से वन मंत्री के समक्ष रखा गया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की आवश्यकताओं को देखते हुए नियमों के दायरे में आवश्यक विकास कार्यों का रास्ता निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सड़क, पुल-पुलिया और बिजली जैसी सुविधाएं ग्रामीणों के लिए बेहद जरूरी हैं। मंत्री द्वारा स्वयं क्षेत्र में पहुंचकर समस्याओं का जायजा लेने और उनके निराकरण के लिए पहल करने का आश्वासन सकारात्मक संकेत है। इससे ग्रामीणों में समस्याओं के समाधान को लेकर नई उम्मीद जगी है।

विकास के साथ ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा जरूरी : अरुण सार्वा

जिला पंचायत धमतरी के अध्यक्ष अरुण सार्वा ने कहा कि जंगल क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीण भी बेहतर जीवन और मूलभूत सुविधाओं के हकदार हैं। सड़क और पुल-पुलिया जैसी सुविधाओं के अभाव में उन्हें आवागमन सहित अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।उन्होंने कहा कि वन संरक्षण के नियमों का पालन करते हुए ग्रामीणों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप विकास कार्य किए जाने चाहिए। विकास और वन संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए ग्रामीणों के अधिकारों और हितों की रक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।

मुलाकात को बताया सकारात्मक, समाधान की जगी उम्मीद

जंगल-जमीन संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने वन मंत्री के साथ हुई मुलाकात को सकारात्मक और सार्थक बताया। समिति के सदस्यों ने कहा कि मंत्री ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और स्वयं क्षेत्र में पहुंचकर जमीनी स्थिति देखने की बात कही है। प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि मंत्री के आश्वासन के बाद सीतानदी-उदंती क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं के निराकरण की दिशा में नियमानुसार ठोस पहल होगी। समिति ने कहा कि उसका उद्देश्य ग्रामीणों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके अधिकारों और हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है।

ये रहे प्रतिनिधिमंडल में शामिल

प्रतिनिधिमंडल में चन्द्रकुमार अग्रवानी, रेवाप्रसाद देवदास, ईश्वरी नेताम, श्रीधन सोम, दैनिक राम मंडावी, उदय सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वन मंत्री द्वारा स्वयं क्षेत्र में पहुंचकर ग्रामीणों की समस्याओं को देखने की पहल महत्वपूर्ण है। इससे लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान की उम्मीद और मजबूत हुई है।

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