ad inner footer

राहुद के शासकीय तालाब पर ग्रामीणों की बड़ी जीत, नामांतरण आदेश निरस्त

एसडीएम टंकेश्वर प्रसाद साहू ने सुनाया फैसला, तालाब को शासकीय निस्तारी दर्ज करने का आदेश; अब संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

बालोद/गुंडरदेही। ग्राम राहुद के नया तालाब से जुड़े लंबे समय से चल रहे राजस्व विवाद में ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) टंकेश्वर प्रसाद साहू ने 27 अक्टूबर 2026 को प्रकरण में आदेश जारी करते हुए तहसीलदार द्वारा तालाब का नामांतरण निजी व्यक्तियों के नाम किए जाने संबंधी आदेश को गलत ठहराया और तालाब को शासकीय निस्तारी तालाब के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया। इस फैसले को ग्रामीणों की लंबी कानूनी लड़ाई में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।

2019 में भी शासकीय निस्तारी तालाब होने का फैसला

प्रकरण के अनुसार, वर्ष 2019 में एसडीएम न्यायालय में इस तालाब को शासकीय निस्तारी तालाब माना जा चुका था। इसके बावजूद बाद में तहसीलदार राहुल गुप्ता के न्यायालय से तालाब का नाम तुलसीराम पिता प्रेमलाल साहू एवं दिनेश कुमार साहू पिता नेतराम साहू के नाम दर्ज किए जाने का आदेश जारी हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि नामांतरण की जानकारी उन्हें तालाब में मछली पालन की गतिविधि सामने आने के बाद मिली। इसके बाद ग्रामीणों ने एसडीएम न्यायालय में याचिका दायर कर आदेश को चुनौती दी।

अपील और पुनरीक्षण के बाद फिर शुरू हुई सुनवाई

ग्रामीणों की याचिका के विरुद्ध विलंब के आधार पर धारा 5 के तहत आपत्ति उठाई गई। इसके बाद प्रकरण अपर कलेक्टर न्यायालय तक पहुंचा। ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत राहुद की ओर से भी तालाब को दिनेश कुमार साहू के नाम दर्ज किए जाने पर आपत्ति नहीं होने संबंधी प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। ग्रामीणों ने इस प्रस्ताव पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसका इस्तेमाल निजी हित साधने के लिए किया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने अपर कलेक्टर के आदेश के विरुद्ध कमिश्नर न्यायालय में अपील की। ग्रामीणों के मुताबिक, कमिश्नर न्यायालय ने पूर्व के आदेशों को त्रुटिपूर्ण मानते हुए एसडीएम को पुनः सुनवाई कर तीन माह के भीतर निर्णय देने का निर्देश दिया। आगे अपर कलेक्टर न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर होने के कारण सुनवाई प्रभावित हुई। ग्रामीणों ने इस संबंध में जनदर्शन और मुख्यमंत्री जनशिकायत पोर्टल पर शिकायतें भी दर्ज कराईं। अंततः पुनरीक्षण याचिका खारिज होने के बाद एसडीएम न्यायालय में दोबारा सुनवाई का रास्ता साफ हुआ।

फाइल में देरी को लेकर भी ग्रामीणों ने उठाए सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि अपर कलेक्टर न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका 22 सितंबर 2026 को खारिज होने के बावजूद संबंधित फाइल एसडीएम न्यायालय तक समय पर नहीं पहुंची। ग्रामीणों को 6 अक्टूबर की पेशी के दौरान इसकी जानकारी मिली। उनके अनुसार, एसडीएम कार्यालय में पूछताछ करने पर पता चला कि फाइल 10 अक्टूबर तक वहां प्राप्त नहीं हुई थी। इसके बाद संबंधित लिपिक के विरुद्ध मुख्यमंत्री जनशिकायत पोर्टल पर शिकायत की गई। ग्रामीणों का दावा है कि शिकायत के बाद फाइल एसडीएम न्यायालय भेजी गई और प्रकरण में आगे की सुनवाई हुई।

दस्तावेजों की वैधता पर ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि तहसील न्यायालय में प्रस्तुत इश्तहार, मुनादी और वारिस संबंधी दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं थीं। उनका दावा है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर शासकीय तालाब का नामांतरण कराया गया, जबकि वर्ष 2019 के पूर्व आदेश में तालाब को शासकीय निस्तारी संपत्ति माना गया था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा कथित दस्तावेजों की वैधता की जांच संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन पहलुओं पर आधिकारिक जांच और अभिलेखों का परीक्षण आवश्यक है।

न्यायालय में दोनों पक्षों ने रखे अपने तर्क

एसडीएम न्यायालय में प्रकरण की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से कानूनी पक्ष प्रस्तुत किए गए। सुनवाई के बाद एसडीएम ने तहसीलदार के पूर्व आदेश को गलत ठहराते हुए तालाब को शासकीय निस्तारी तालाब के रूप में दर्ज करने का आदेश जारी किया। इस निर्णय से ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग को न्यायिक राहत मिली है।

अब जांच और जवाबदेही पर टिकी निगाहें

फैसले के बाद ग्रामीणों ने कथित दस्तावेजी अनियमितताओं, नामांतरण प्रक्रिया और राजस्व अभिलेखों के संचालन की जांच की मांग उठाई है। उनका सवाल है कि यदि तालाब पहले से शासकीय निस्तारी संपत्ति के रूप में दर्ज था, तो बाद में निजी नामांतरण किन आधारों पर हुआ और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किस प्रकार किया गया। 

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सक्षम प्रशासनिक अधिकारी प्रकरण के मूल अभिलेखों की जांच कराते हैं या नहीं तथा किसी अधिकारी अथवा अन्य व्यक्ति की जिम्मेदारी स्थापित होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है या नहीं। फिलहाल एसडीएम के आदेश के बाद राहुद के इस तालाब को लेकर ग्रामीणों की कानूनी लड़ाई में एक महत्वपूर्ण पड़ाव आया है।

Head & Tail News से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें — 👇 https://chat.whatsapp.com/DPEyFUDVTgV6QbjuwJvqqJ

और नया पुराने

Recent in Technology