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महासमुंद में श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान सप्ताह का भव्य शुभारंभ, भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हुआ वातावरण

 महासमुंद में श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान सप्ताह का भव्य शुभारंभ, भक्ति और श्रद्धा से सराबोर हुआ वातावरण

कलश यात्रा में उमड़ा आस्था का सागर, श्रीकृष्ण बाल प्राकट्य उत्सव की नयनाभिराम झांकी ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर


महासमुंद, 08 जून।

शहर के बी.टी.आई. रोड स्थित तनुजा मेडिकल के समीप आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान सप्ताह का शुभारंभ 4 जून को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ। इस आध्यात्मिक आयोजन ने नगरवासियों को धर्म, भक्ति और संस्कृति की अनुपम धारा से जोड़ दिया है। कथा स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर श्रीहरि की कथा का अमृतपान कर रहे हैं।



कथा के प्रथम दिवस आचार्य श्री नारायण दास वैष्णव जी महाराज (श्रीराम मंदिर, महासमुंद) के सानिध्य में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। कथा स्थल से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरी इस यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। सिर पर मंगल कलश धारण किए महिलाओं की कतारें, गूंजते हरिनाम संकीर्तन, शंखध्वनि, जय श्रीराम और जय श्रीकृष्ण के जयघोषों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया और भगवान की भक्ति में लीन होकर धर्ममय वातावरण का अनुभव किया।

भागवत कथा : कलियुग में मोक्ष का सरलतम मार्ग

कथा व्यासपीठ से आचार्य श्री नारायण दास वैष्णव जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण वेदों और पुराणों का सार है, जो जीवात्मा को परमात्मा से जोड़ने का दिव्य माध्यम है। उन्होंने बताया कि कलियुग में भगवान के नाम, सत्संग और भागवत श्रवण से बढ़कर कोई साधन नहीं है। भागवत कथा मनुष्य के अंतःकरण को निर्मल करती है तथा उसे धर्म, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की ओर प्रेरित करती है।

द्वितीय स्कंध के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन

कथा के द्वितीय दिवस आचार्य श्री ने राजा परीक्षित और परम ज्ञानी श्री शुकदेव जी महाराज के दिव्य संवाद का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जीवन क्षणभंगुर है, इसलिए प्रत्येक मनुष्य को मृत्यु से पूर्व प्रभु स्मरण और सत्कर्मों का आश्रय लेना चाहिए। भागवत में वर्णित श्री शुकदेव जी की शिक्षाएं आज भी मानव जीवन को सही दिशा प्रदान करती हैं।

आचार्य जी ने देवर्षि नारद के चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि सत्संग, संत सेवा और भगवान के नाम का निरंतर स्मरण साधारण व्यक्ति को भी महान भक्त बना सकता है। उन्होंने कहा कि जिस हृदय में भगवान के प्रति प्रेम जागृत हो जाता है, वहां सांसारिक दुख स्वतः समाप्त होने लगते हैं।



प्रह्लाद चरित्र ने दिया अटूट भक्ति का संदेश

कथा के तृतीय दिवस भक्त शिरोमणि प्रह्लाद चरित्र का वर्णन किया गया। आचार्य जी ने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी जिसने भगवान का आश्रय नहीं छोड़ा, वही सच्चा भक्त कहलाता है। भगवान नरसिंह द्वारा भक्त प्रह्लाद की रक्षा का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा के दौरान बार-बार "नरसिंह भगवान की जय" के जयघोष गूंजते रहे।

वामन अवतार की कथा से मिला दान और विनम्रता का संदेश

चतुर्थ दिवस भगवान वामन अवतार की दिव्य कथा का वर्णन किया गया। आचार्य जी ने बताया कि भगवान ने दैत्यराज बलि की परीक्षा लेकर संसार को यह संदेश दिया कि अहंकार का त्याग और समर्पण ही ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है। वामन भगवान के विराट स्वरूप का वर्णन सुन श्रद्धालु भक्तिरस में डूब गए।

श्रीकृष्ण बाल प्राकट्य उत्सव की मनमोहक झांकी

कथा के पंचम दिवस श्रीकृष्ण जन्म एवं बाल प्राकट्य उत्सव अत्यंत हर्षोल्लास और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। नंद भवन, कारागार, यशोदा मैया, नंद बाबा और बाल गोपाल की आकर्षक झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर पूरा पंडाल "नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के जयघोषों से गूंज उठा।

जब व्यासपीठ से भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का प्रसंग सुनाया गया, तब श्रद्धालुओं ने खड़े होकर तालियों और जयकारों के साथ उत्सव मनाया। अनेक भक्तों की आंखें श्रद्धा और प्रेम के भाव से नम हो गईं। वातावरण ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं द्वापर युग की दिव्य लीलाएं साकार हो उठी हों।

विधिवत संपन्न हो रहा है संपूर्ण अनुष्ठान

इस पावन आयोजन में पुरोहित एवं पारायणकर्ता पंडित सूरज दास वैष्णव (चिंगरौद) द्वारा वैदिक विधि-विधान के साथ सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जा रहे हैं। उनके सानिध्य में यज्ञ, पूजन और भागवत पारायण की प्रक्रिया निरंतर जारी है।

श्रद्धालुओं की सेवा में जुटा चंद्राकर परिवार

श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान सप्ताह का आयोजन चंद्राकर परिवार द्वारा श्रद्धा और समर्पण भाव से किया जा रहा है। आयोजन को सफल बनाने में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं तथा स्वयंसेवकों का भी सराहनीय योगदान मिल रहा है। भीषण गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कथा का समय परिवर्तित कर प्रतिदिन सायं 4 बजे से रखा गया है।


कथा का यह दिव्य आयोजन 12 जून तक निरंतर चलेगा, जिसमें श्रीकृष्ण लीलाएं, गोवर्धन पूजा, रुक्मिणी विवाह, सुदामा चरित्र तथा भागवत महात्म्य सहित अनेक पौराणिक प्रसंगों का रसपूर्ण वर्णन किया जाएगा।

भागवत कथा के इस आध्यात्मिक महोत्सव ने महासमुंद की पावन धरा को भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति के रंग में रंग दिया है, जहां प्रतिदिन श्रद्धालु भगवान श्रीहरि की कथा सुनकर अपने जीवन को धन्य बना रहे हैं। 🙏🕉️॥ हरि: ॐ ॥

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