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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री रमेश सिन्हा ने जिला न्यायालय महासमुंद का किया औचक निरीक्षण

लंबित मामलों के शीघ्र निराकरण, डिजिटलीकरण और न्यायिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण पर दिया जोर

महासमुंद, 11 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री रमेश सिन्हा ने शनिवार को जिला न्यायालय महासमुंद का औचक निरीक्षण कर न्यायालयीन व्यवस्थाओं, न्यायिक अधोसंरचना एवं लंबित प्रकरणों के निराकरण की समीक्षा की। उन्होंने न्यायालय परिसर के विभिन्न अनुभागों, नजारत शाखा, अभिलेखागार, ई-सेवा केंद्र, क्लिनिक, किलकारी कक्ष, लॉ लाइब्रेरी, एडीआर भवन, डिजिटाइजेशन सेंटर तथा निर्माणाधीन कुटुंब न्यायालय भवन का विस्तृत निरीक्षण किया।

जिला एवं सत्र न्यायालय महासमुन्द 

निरीक्षण के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने न्यायालयों की कार्यप्रणाली, आधारभूत सुविधाओं, प्रस्तावित न्यायालय भवनों की प्रगति तथा आम नागरिकों और पक्षकारों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी, उत्तरदायी एवं जनोन्मुखी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने न्यायालयों में पेपरलेस कार्यप्रणाली को बढ़ावा देने पर विशेष बल देते हुए डिजिटाइजेशन सेंटर का निरीक्षण किया तथा आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी के अधिकतम उपयोग के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया को सरल, त्वरित एवं पारदर्शी बनाने के निर्देश दिए। साथ ही न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों से संवाद कर न्याय वितरण प्रणाली में दक्षता, पारदर्शिता और जनसुलभता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

निरीक्षण के दौरान न्यायालय कक्षों एवं विभिन्न अनुभागों में संचालित कार्यों पर उन्होंने संतोष व्यक्त किया। न्यायालय परिसर की स्वच्छता, उद्यान (गार्डन) के सुव्यवस्थित रखरखाव तथा अन्य व्यवस्थाओं की भी सराहना की।


मुख्य न्यायाधीश ने न्यायाधीशों को लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के निर्देश देते हुए कहा कि 10 वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों एवं वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित प्रकरणों का नियमानुसार प्राथमिकता के आधार पर त्वरित निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने न्यायिक कार्यों में गुणवत्ता के साथ समयबद्धता बनाए रखने पर भी बल दिया। उन्होंने आगामी 18 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत की तैयारियों की समीक्षा करते हुए परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 (चेक बाउंस) से संबंधित प्रकरणों की जानकारी ली। उन्होंने समझौता योग्य मामलों में पक्षकारों की सहमति से अधिकाधिक प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान माननीय मुख्य न्यायाधीश ने जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों से भी चर्चा कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली तथा न्यायिक व्यवस्था को और अधिक सुगम, प्रभावी एवं नागरिक हितैषी बनाने के लिए सकारात्मक सहयोग का आश्वासन दिया।उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति श्री रमेश सिन्हा न्यायिक अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण एवं न्यायिक प्रक्रिया में आधुनिक तकनीकों के प्रभावी उपयोग के प्रबल समर्थक रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में न्यायालय भवनों के आधुनिकीकरण, डिजिटलीकरण तथा तकनीकी नवाचारों को नई गति मिली है, जिससे राज्य में न्यायिक सेवाएं अधिक पारदर्शी, दक्ष एवं नागरिक-केंद्रित बन रही हैं।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल श्री रजनीश श्रीवास्तव, ज्वाइंट रजिस्ट्रार-कम-प्रिंसिपल प्राइवेट सेक्रेटरी श्री एम.वी.एल.एन. सुब्रमण्यम, प्रोटोकॉल अधिकारी श्री रविंदर सिंह नेगी, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश महासमुंद श्रीमती अनिता डहरिया, प्रधान न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय श्री प्रफुल्ल कुमार सोनवानी, जिले के अन्य न्यायाधीशगण, कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह, पुलिस अधीक्षक श्री प्रभात कुमार, जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी, अधिवक्तागण तथा न्यायालयीन अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


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