पहली बार समझाइश, दोबारा पकड़े जाने पर पालकों पर होगी कानूनी कार्रवाई; स्कूलों में PTM और जागरूकता अभियान अनिवार्य
धमतरी 31 जुलाई 2026। जिले में नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर अब पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों के प्राचार्यों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कोई भी नाबालिग छात्र-छात्रा वाहन लेकर स्कूल न पहुंचे। यदि ऐसा पाया जाता है तो तत्काल पालकों को बुलाकर समझाइश दी जाए और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दी जाए।
कलेक्टर ने वर्चुअल बैठक में कहा कि बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाना कानून का उल्लंघन होने के साथ-साथ बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने सभी विद्यालयों में एक सप्ताह के भीतर पालक-शिक्षक बैठक (PTM) आयोजित कर अभिभावकों को सड़क सुरक्षा, मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों और सुरक्षित परिवहन के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। साथ ही स्कूल बस, साइकिल, सार्वजनिक परिवहन अथवा पालकों द्वारा सुरक्षित आवागमन जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाएं अपनाने पर जोर दिया बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि विद्यालयों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री, असामाजिक गतिविधियां अथवा विद्यार्थियों के लिए असुरक्षित माहौल पाए जाने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध तत्काल कठोर कार्रवाई की जाएगी। विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच विकसित करने के लिए योग, खेलकूद, नैतिक शिक्षा, यातायात जागरूकता और नशामुक्ति कार्यक्रम नियमित रूप से संचालित करने के भी निर्देश दिए गए।
पुलिस अधीक्षक भावना पाण्डेय ने बताया कि जिले में नाबालिग वाहन चालकों के खिलाफ विशेष अभियान लगातार चलाया जा रहा है। पहली बार पकड़े जाने पर पालकों को यातायात थाना बुलाकर समझाइश दी जा रही है, लेकिन दोबारा उल्लंघन होने पर मोटर वाहन अधिनियम के तहत पालकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में 25 हजार रुपये तक का जुर्माना, तीन वर्ष तक की सजा अथवा दोनों का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि जिले के 36 विद्यालयों में अब तक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। इन कार्यक्रमों में सड़क सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, नशामुक्ति, यातायात नियमों के पालन और जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दिया जा रहा है। कलेक्टर ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें और किसी भी परिस्थिति में उन्हें बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने की अनुमति न दें। उन्होंने कहा कि "सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य और सुरक्षित समाज" के निर्माण में प्रशासन, विद्यालय, पालकों और समाज की साझा जिम्मेदारी है।

