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चाकू के वार से टूटी जिंदगी, अब राइस मिल और श्रम विभाग भी सवालों के घेरे में

प्रेम, शक और मोबाइल रिचार्ज से शुरू विवाद का दर्दनाक अंत; घायल महिला मजदूर की इलाज के दौरान मौत, आरोपी गिरफ्तार

धमतरी/कुरूद। कुरूद के भोथली स्थित बालाजी राइस मिल में शुक्रवार को हुए चाकूबाजी कांड का अब दर्दनाक अंत हो गया है। गंभीर रूप से घायल महिला मजदूर अनीता मंडावी ने रविवार सुबह धमतरी के एकता हॉस्पिटल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। महिला की मौत के बाद यह मामला अब केवल प्रेम संबंध, शक और चाकूबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिल परिसर में महिला मजदूरों की सुरक्षा, प्रबंधन की जवाबदेही और श्रम विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक महिला मजदूर पर मिल परिसर में ही धारदार हथियार से हमला होना और इसके बाद उसकी मौत हो जाना पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को सामने ला रहा है।

मोबाइल रिचार्ज से शुरू हुआ शक, चाकू के वार तक पहुंचा विवाद

पुलिस से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कोण्डागांव निवासी अनीता मंडावी बालाजी राइस मिल में रेजा मजदूर के रूप में काम करती थी। उसी मिल में काम करने वाले भांठागांव निवासी दुलेश्वर टंडन के साथ उसके प्रेम संबंध होने की बात सामने आई थी। बताया जा रहा है कि आरोपी महिला के मोबाइल पर अपने पैसों से रिचार्ज करवाता था। इसी दौरान उसे संदेह हुआ कि अनीता किसी दूसरे युवक से मोबाइल पर बातचीत करती है। मोबाइल पर बातचीत को लेकर पैदा हुआ यह शक धीरे-धीरे विवाद में बदल गया और मामला गंभीर होता चला गया। आरोप है कि शुक्रवार को इसी विवाद के बाद दुलेश्वर महिला के कमरे तक पहुंचा और चाकू से उस पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में अनीता की कमर, जांघ सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। अचानक हुए इस हमले से मिल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद घायल महिला को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

कुरूद से धमतरी रेफर, इलाज के दौरान मौत

चाकू के हमले में गंभीर रूप से घायल अनीता को तत्काल सिविल अस्पताल कुरूद पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने उसे धमतरी रेफर कर दिया। इसके बाद उसे धमतरी के एकता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार चल रहा था। परिजनों और आसपास के लोगों को उम्मीद थी कि गंभीर चोटों के बावजूद इलाज से अनीता की जान बच जाएगी, लेकिन रविवार सुबह इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। एक महिला मजदूर की जिंदगी खत्म होने के साथ ही अब यह मामला और गंभीर हो गया है। मौत के बाद पुलिस जांच का दायरा भी घटना की परिस्थितियों और उससे जुड़े सभी कानूनी पहलुओं तक बढ़ना स्वाभाविक है।

आरोपी पहले ही गिरफ्तार, अब मौत के बाद बदलेगा कानूनी स्वरूप

घटना के बाद कुरूद पुलिस ने आरोपी दुलेश्वर टंडन को गिरफ्तार कर लिया था। प्रारंभिक कार्रवाई में हत्या के प्रयास सहित संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई थी। अब घायल महिला की इलाज के दौरान मौत हो जाने के बाद पुलिस को मृत्यु के तथ्य के आधार पर मामले के कानूनी स्वरूप और लागू धाराओं की पुनः समीक्षा करनी होगी। आगे की कार्रवाई पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मेडिकल दस्तावेज, उपचार संबंधी रिकॉर्ड, केस डायरी और जांच के दौरान सामने आने वाले अन्य तथ्यों के आधार पर होगी। घटना की वास्तविक परिस्थितियां और आरोपी की भूमिका भी जांच के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

मिल परिसर में घुसकर हमला... सुरक्षा व्यवस्था कहां थी?

इस पूरी घटना का सबसे बड़ा सवाल अब बालाजी राइस मिल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। एक व्यक्ति कथित रूप से धारदार हथियार लेकर मिल परिसर के अंदर महिला मजदूर के कमरे तक पहुंच गया। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि मिल के प्रवेश और निगरानी की व्यवस्था कैसी थी? क्या मिल के मुख्य द्वार पर आने-जाने वाले लोगों की निगरानी होती है? क्या बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश का कोई रिकॉर्ड रखा जाता है? क्या पूर्व कर्मचारियों के प्रवेश को लेकर कोई व्यवस्था है? क्या श्रमिकों के आवासीय क्षेत्र में अलग सुरक्षा व्यवस्था है? क्या कर्मचारियों के बीच विवाद या तनाव की स्थिति से निपटने के लिए कोई सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू है? और क्या महिला मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई विशेष व्यवस्था की गई है? इन सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आना जरूरी है। फिलहाल इन प्रश्नों के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था को सीधे दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन घटना के बाद इन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की जांच की जरूरत जरूर सामने आई है।

रोटी, कपड़ा और मकान के साथ सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?

राइस मिलों में दूर-दराज के क्षेत्रों से मजदूरों को काम के लिए लाया जाता है। कई मजदूर मिल परिसर अथवा उसके आसपास रहकर काम करते हैं। ऐसे में केवल रोजगार उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं माना जा सकता। काम करने और रहने की जगह पर श्रमिकों की सुरक्षा, मूलभूत सुविधाएं और आपात स्थिति में सहायता की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होती है। अनीता मंडावी की मौत ने इसी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। एक महिला मजदूर अपने कार्यस्थल से जुड़े परिसर में गंभीर रूप से घायल हुई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि घटना के समय सुरक्षा व्यवस्था क्या थी और क्या सुरक्षा संबंधी कोई ऐसी कमी थी, जिसे समय रहते दूर किया जा सकता था। यदि जांच में सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी, लापरवाही अथवा निर्धारित नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित स्तर पर जिम्मेदारी तय करने और आवश्यक सुधार की कार्रवाई की जरूरत होगी।

श्रम विभाग की निगरानी पर भी उठेंगे सवाल

घटना के बाद श्रम विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। क्षेत्र की राइस मिलों में महिला और पुरुष श्रमिकों के लिए सुरक्षा, आवास, स्वच्छता, शौचालय तथा अन्य श्रम संबंधी व्यवस्थाओं का वास्तविक निरीक्षण किस स्तर पर होता है, यह भी जांच का विषय होना चाहिए। क्या राइस मिलों का नियमित निरीक्षण होता है? क्या महिला मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था की अलग से समीक्षा की जाती है? क्या श्रमिकों के रहने की व्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं की स्थिति देखी जाती है? क्या कार्यस्थल पर कर्मचारियों के बीच होने वाले विवाद या शिकायतों की कोई निगरानी व्यवस्था है? अनीता की मौत के बाद इन सवालों को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय जमीनी स्तर पर देखने की जरूरत महसूस हो रही है। यदि संबंधित विभाग की जांच में किसी नियम के उल्लंघन या सुरक्षा संबंधी कमी की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई भी अपेक्षित होगी।

इलाज में कथित लापरवाही की बात भी जांच के दायरे में

इधर उपचार के दौरान कथित लापरवाही से जुड़ी कुछ बातें भी सामने आने की चर्चा है। हालांकि इस संबंध में स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी आवश्यक है। ऐसे संवेदनशील मामले में बिना मेडिकल रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। यदि मृतका के परिजनों की ओर से इस संबंध में कोई शिकायत सामने आती है, तो मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार प्रक्रिया, चिकित्सकीय दस्तावेज और संबंधित परिस्थितियों की सक्षम स्तर पर जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

अब सवाल सिर्फ आरोपी तक सीमित नहीं

अनीता मंडावी की मौत के बाद आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तो जारी रहेगी ही, लेकिन इसके साथ कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित विभागीय निगरानी भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। एक महिला मजदूर मिल परिसर से जुड़े आवासीय क्षेत्र में गंभीर रूप से घायल हुई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अब सवाल यह है कि घटना से पहले सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी, घटना के समय क्या इंतजाम थे और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। अनीता की मौत ने एक परिवार से जिंदगी छीनी है, लेकिन साथ ही राइस मिलों में काम करने वाली तमाम महिला मजदूरों की सुरक्षा का सवाल भी सामने ला खड़ा किया है। अब जांच सिर्फ यह बताए कि चाकू किसने चलाया, इतना ही पर्याप्त नहीं होगा। यह भी सामने आना चाहिए कि घटना की परिस्थितियां कैसे बनीं, क्या सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी थी और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने की जिम्मेदारी कौन और किस स्तर पर निभाएगा।

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